हिंदी दिवस विशेष : हिंदी हूँ मैं तुम्हारी अपनी हिंदी !!

हिंदी हूँ मैं
तुम्हारी अपनी हिंदी
भाषा कहो या पहचान
गर्व कहो या शान
कुछ भी कह लो
हिंदी हूँ मैं तुम्हारी अपनी हिंदी।

सिंधु माँ के किनारे जब हुआ था उद्भव तुम्हारा
सिंध कहलाये तुम
और कालांतर में जब तुम सिंध से हिन्द बने
तुम्हारी भाषा होने के नाते
मेरा नामकरण भी हो गया हिंदी।

सदियों से तुम्हारी हूँ
तब भी जब उर्दू आयी थी
तब भी जब अंग्रेजी आयी थी
तब भी जब क्षेत्रीय भाषा,
बोली के प्यार से तुम मुझे तुलना करने लगे
तब भी तुम्हारी ही थी मैं
तुम्हारी अपनी हिंदी

जानते हो मैं क्यों थी ,
क्यूंकि तुम थे
मुझे सँभालने-बचाने के लिए हरदम
कभी कबीर मीरा के रूप में
कभी प्रेमचंद, रेनू , निराला और जयशंकर प्रसाद के रूप में
कितने रूप में तुम आये और बचा लिया था मुझे

लेकिन अब मैं डर रही हूँ
किसी और से नहीं बल्कि तुम से
तुम्हारे किसी अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन से लगाव से नहीं
बल्कि तुम्हारी मेरे प्रति उदासीनता से

फिर भी आज भी मैं आश्वस्त हूँ
तुम आओगे किसी ना किसी रूप में
अपनी कलम, अपनी जिह्वा से मुझे बचाने
क्यूंकि हिंदी हूँ मैं
तुम्हारी अपनी हिंदी।