व्यक्ति विशेष / पुण्यतिथि विशेष – नीम करौली बाबा !

Neem Karoli Baba and Facebook

Neem Karoli Baba

नीम करौली बाबा , जिनका प्रभाव फेसबुक के स्वामी मार्क जुकेरबर्ग , एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स और गूगल डॉट ओआरजी के पूर्व निदेशक लैरी ब्रिलियंट जैसे विश्व के टेक जीनियस पर भी रहा है। इतना ही नहीं दुनिया भर के महान हस्तियों के अलावे पूर्व भारतीय राष्ट्रपति विवि गिरी , पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर बिड़ला ग्रुप के जेके बिड़ला आदि भी नीम करोली बाबा से प्रभावित रहे हैं।

मार्क जुकेरबर्ग नीम करोली बाबा के आश्रम में :


नैनीताल के नजदीक कैंची के नीम करोली आश्रम के संचालक विनोद जोशी के मुताबिक
” मुझे अमेरिका से गूगल ओआरजी के निदेशक और प्रसिद्द डॉक्टर लैरी ब्रिलियंट का कॉल कुछ दिन पहले आया था। उन्होंने कहा था की मार्क नाम का एक व्यक्ति आश्रम में रहने आ रहा है। “
“मुझे नहीं पता था था यह मार्क जुकेरबर्ग कौन है। उस समय फेसबुक का भारत में अता पता भी नहीं था। मैंने मार्क के रहने की व्यवस्था करवाई। वो 5 दिन इस आश्रम में रहा।


बकौल मार्क जुकेरबर्ग , जब कुछ साल पहले मोदी अमेरिका की यात्रा पर थे तो उन्होने जुकेरबर्ग से मुलाकात थी। तक मार्क ने जिक्र किया की
” जब वो फेसबुक को बड़ा बनाने में लगे थे तभी उनकी मुलाकात एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स से हुयी थी। स्टीव ने बातों बातों में उन्हें भारत के आश्रम का पता बताया। और उन्हें कहा की मुझे भारत में उस आश्रम में जाना चाहिए। इससे मुझे अपने लक्ष्य प्राप्ति में काफी मदद मिलेगी। “
वो आश्रम जिसका जिक्र फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकेरबर्ग ने किया था वो और कोई नहीं नीम करोली बाबा का शर्म ही था।
स्टीव जॉब्स पर आयी पुस्तक में भी इस बात का जिक्र है की अपने दोस्त और मार्गदर्शक रोबर्ट फ्रीडलैंड जो नीम करोली बाबा के भक्त भी थे के कहने पर स्टीव जॉब्स भारत आये थे और नीम करोली बाबा के आश्रम में काफी दिन रुके थे।

बाबा का चमत्कार :


बाबा का मूल नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उनका जन्म ग्राम अकबरपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और बाबा ने अपना शरीर वृन्दावन में 11 सितम्बर १९७३ को त्यागा था।
बाबा से सम्बंधित एक कहानी बहुत प्रसिद्द है। एक बार एक युवा योगी लक्ष्मण दास हाथ में चिमटा और कमंडल लिये फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) से टूण्डला जा रही रेल के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में चढ़ गए। कुछ देर बात जब टीटी आया और टिकट माँगा तो बाबा ने कहा उनके पास टिकट नहीं है। टिकट निरीक्षक ने उसे अपमानित करते हुए अगले स्टेशन पर उतार दिया. योगी ने वहीं अपना चिमटा गाड़ दिया और शांत भाव से बैठ गया. गार्ड ने झण्डी हिलाई, पर गाड़ी बढ़ी ही नहीं। इज्जन की जांच की गयी, तो वह एकदम ठीक था। सबने कोशिश किया लेकिन ट्रैन टस से मस ना हुयी। ट्रैन में ही एक व्यक्ति जो बाबा को जानता था , ने ट्रैन के अधिकारीयों से निवेदन किया कि बाबा को ट्रैन में बिठा लो। फिर बाबा को गाड़ी में बैठने का अनुरोध किया गया। बाबा बोले- चलो तुम कहते हो, तो बैठ जाते हैं. उनके बैठते ही गाड़ी चल दी। इस घटना से वह योगी और नीम करोरी गाँव दोनों प्रसिद्द हो गया।