व्यक्ति विशेष / जन्मतिथि – फिरोज़ गांधी।

Feroze Gandhi !

Feroze Gandhi !

ऐसा गाँधी जिसे देश ना तो याद करता है, और ना ही देश की मीडिया या राजनेता उसका चर्चा करना पसंद करते हैं।

एक बेजोड़ सांसद , एक स्वतंत्रता सेनानी, लोकतंत्र के हिमायती , प्रेस की स्वतंत्रता के रक्षक , १९५० में अस्थायी सांसद, १९५२ और १९५७ में लोकसभा संसद के तैर पर कई उपलब्धियों के बावजूद देश न तो फिरोज गाँधी के पुण्यतिथि पर और न ही उनकी जन्मतिथि पर उन्हें याद करने की जहमत उठाता है। प्रश्न उठता है क्यों और जवाब है – देश की राजनैतिक परिस्थिति।
इंदिरा गाँधी के पति , जवाहर लाल नेहरू के एकलौते दामाद, गाँधी जी के शिष्य, राजीव गाँधी और संजय गाँधी के पिता, सोनिया गाँधी और मेनका गाँधी के ससुर, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और वरुण गाँधी के दादा के बारे आज के युवा अगर जानते तक नहीं हैं तो ये देश का दुर्भाग्य और राजनैतिक विवशता है।


एक सच्चे, बेहद प्रतिबद्ध और कर्मठ जनप्रतिनिधि को देश ने भुला दिया है तो इसके पीछे की भी एक कहानी है।


फिरोज का जन्म मुंबई के एक पारसी परिवार में १२ सितम्बर १९१२ को हुआ था। फिरोज खान और इंदिरा गाँधी का प्रेम प्रसंग एक समय देश के सबसे चर्चित मसलों में से एक था। चूँकि फिरोज मुस्लिम थे और इंदिरा हिन्दू इसलिए जवाहर लाल नेहरू को उनके सम्बन्ध से आपत्ति थी। बाद में महात्मा गाँधी जी के हस्तक्षेप से दोनों का विवाह हुआ। और गाँधी जी ने अपना सरनेम भी दोनों को दिया। तभी से आज के भारतीय राजनीती के सबसे ताकतवर गाँधी नेहरू परिवार को गाँधी सरनेम मिला।


बाद में १९४९ में जब इंदिरा और फिरोज के बीच तल्खियाँ बढ़ीं तो इंदिरा अपने दोनों बच्चों राजीव और संजय के साथ अपने पिता के घर आ गयीं। इसी के साथ नेहरू और फिरोज के बीच की दूरियां भी बढ़ती गयी। नेहरू जी के मंत्रिमंडल के कई गड़बड़ियों को उजागर करने में फिरोज गाँधी की भूमिका रही। बाद में फिरोज गाँधी बीमार रहने लगे और ४७ वर्ष की अल्प आयु में ही ८ सितम्बर १९६० को उनका देहांत हो गया। हालाँकि फिरोज के आखिरी दिनों इंदिरा हमेशा उनके साथ रहीं।