क्या सचमुच आर्थिक मंदी के चपेट में है देश ??

What is GDP OF India

बीते कई दिनों से एक बात जो सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है वो है आर्थिक मंदी  और जीडीपी। आर्थिक मामलों के जानकार हों या आम आदमी जिसे जीडीपी का जी तक पता नहीं है, सभी अपना विचार ठेले जा रहे हैं। पत्रकार से लेकर विभिन्न पार्टियों के चाटुकार तक , पक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी इस विषय पर चीख चीख कर अपना विचार रखे जा रहे हैं। मिम्स और  ट्रोल से सोशल मीडिया पटा हुआ है। ऐसा लग रहा है मानो सब भाग भाग के चिल्ला रहे हैं आसमान गिर रहा है, आसमान गिर रहा है। लेकिन कोई आसमान के तरफ देख भी नहीं रहा है।

आईये सबसे पहले जानते हैं की जीडीपी और आर्थिक मंदी होता क्या है। और क्या सचमुच देश आर्थिक मंदी  के चपेट में है।

क्या होता है जीडीपी ?

जीडीपी यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट अर्थात सकल घरेलु उत्पाद एक आर्थिक पैमाना है जो बताता है की देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है। जीडीपी किसी खास अवधि में वस्तु और सेवाओं के कुल उत्पादन के आधार पर तय होती है। सामान्य कैलकुलेशन अगर देखें तो ,

GDP (सकल घरेलू उत्पाद) = उपभोग + सकल निवेश + सरकारी खर्च + (निर्यात – आयात) होता है।

मोटे तौर पर कहें तो अगर देश में प्रोडक्शन कम हो जाता है और साथ लोग खर्च में भी कटौती करने लगते हैं तो माना जाता है कि देश का जीडीपी डाउन चल रहा है। भारत में जीडीपी का कैलकुलेशन हर तिमाही में किया जाता है। और अगर पिछले तिमाही की तुलना में वर्तमान तिमाही में जीडीपी काम आँका गया तो मतलब देश की अर्थव्यवस्था की हालत पहले से ख़राब मानी जाती है।

पिछले 10 साल में जीडीपी के आंकड़े :

GDP IN LAST 10 YEARS

पिछले दस साल में अगर देखें तो भारत का जीडीपी अधिकांशतः ग्रोइंग ही रहा है। थोड़े बहुत उतर चढाव जरूर देखने को मिले हैं। इस वर्ष 2019-20 के लिए अनुमानित जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9% था, लेकिन अब इसे 6.3% रहने का ही अनुमान है। अगर ऐसा हुआ तो यह विगत 6 बर्षों में सबसे निचले स्तर पर होगा।

इस वर्ष के पहली तिमाही (अप्रैल से जून ) में जीडीपी रेट 5.8% से घटकर 5% रह गयी है। करीब 7 साल पहले 2012-19 में जीडीपी 4.9 % के सबसे निछले स्तर  पर था। उसके बाद अभी सबसे सुस्त रफ़्तार मानी जा रही है

आर्थिक सुस्ती या आर्थिक मंदी  ?

कुछ लोग इसे मंदी ना मानकर महज आर्थिक सुस्ती मान रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि ये आर्थिक  सुस्ती महज अस्थायी है और इसकी वजह वैश्विक आर्थिक मंदी  है। सरकार जल्द ही इससे निपट लेगी।

वही दूसरी और कुछ अर्थ विशेषज्ञों का मानना है स्थिति उतनी सामान्य नहीं है और काफी भयावह हो सकती है। ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर रिटेल, वस्त्र , एफमसीजी जैसे क्षेत्रों में मंदी  जैसे हालात  हैं।  कर्मचारियों की छटनी, प्रोडक्शन में कमी, खपत में कमी जैसी समस्यायों से आने वाले दिनों में बेरोजगारी जैसी समस्याओं के बढ़ने के आसार भी हैं।

हालाँकि आने वाले तिमाही में उम्मीद है की जीडीपी अपना रफ़्तार पकड़े, बशर्ते सरकार और बैंकिंग सेक्टर सुनियोजित ढंग से इस आर्थिक मंदी से निपटे।