क्या बनेगी एक बार फिर से मोदी सरकार ?

Fir se Modi Sarkaar

एग्जिट पोल के नतीजे जहाँ एक और फिर से इस बात की पुष्टि कि है की नरेंद्र मोदी भारत के दोबारा प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं वहीँ विपक्षी दलों ने एक सुर में एग्जिट पोल को नकार दिया है। अब प्रश्न लाजिमी है कि क्या बनेगी एक बार फिर से मोदी सरकार ?
जहाँ तक एग्जिट पोल का सवाल है तो एग्जिट पोल का इतिहास सच और झूट के बीच में डोलता रहा है। २०१४ में जब अधिकांश एग्जिट पोल ने बीजेपी को बहुमत का आंकड़ा दिया था तो ये सच भी साबित हुआ था लेकिन उससे ठीक पहले २००९ और २००४ में एग्जिट पोल गलत भी साबित हुआ है। २००४ में तो वाजपयी की लहार ऐसी थी की बीजेपी ने चुनाव परिणाम से पहले ही जश्न मनाना शुरू कर दिया था। लेकिन परिणाम आया एकदम उलट। तो फिर से यही सवाल कौंधता है की एग्जिट पोल के नतीजों पर मान लें की क्या बनेगी एक बार फिर से मोदी सरकार ?
लेकिन बात अगर सतही सत्र पर करें और चुनाव के मुद्दों को ध्यान में रखें तो ये संभावना बन रही है की एग्जिट पोल २०१९ में एक बार सही साबित हो सकती है।
आईये देखते हैं वो ६ मुद्दे जिसने मोदी को एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ़ किया है :
१. पुलवामा एयर स्ट्राइक :- जिस तरह से पुलवामा एयर स्ट्राइक के बाद एक राष्ट्रवाद का मुद्दा उछला उसे बीजेपी और मोदी सरकार भुनाने में कामयाब रही। वही विपक्षी दलों ने इसका सबूत मांग कर और शहीदों की राजनीती का आरोप बीजेपी पर लगा कर भी जनता का विश्वाश अपनी और खींचने में पूरी तरह से नाकाम रही।
२. सवर्ण आरक्षण : १०% सवर्ण आरक्षण का मास्टर स्ट्रोक खेल कर बीजेपी ने एक हद्द तक असंतुस्ट सवर्णों को रिझाने में कामयाब रही।
३.SC/ST एक्ट : SC/ST एक्ट पर हुए तमाम राजनीती के वावजूद बीजेपी दलित पिछड़ों को ये समझने में सफल रही की उनसे आरक्षण छीना नहीं जा रहा है और बीजेपी की सरकार दलित पिछड़ों के भलाई के लिए कटिबद्ध है।
४. भ्रस्टाचार : एक अहम् मुद्दा जिसने कांग्रेस से सत्ता छीनी थी वो थी भ्रस्टाचार का मुद्दा। बीजेपी और मोदी सरकार इस सन्देश को देने में सफल रही की उनके ५ साल में भ्रस्टाचार बिल्कुल ना के बराबर हुआ है। जहा तक राफेल डील की बात है तो इस मुद्दे पर मोदी सर्कार की किरकिरी हुयी भी। एक समय लगा की राहुल गाँधी और अन्य विपक्षी दलों में सर्कार को घेर लिया है लेकि सुप्रीम कोर्ट और सैन्य अधिकारीयों के आधिकारिक बयां ने विपक्ष के आरोपों की हवा निकाल दी। चौकीदार चोर है के नारे मैं भी चौकीदार में बदलने लगे।
५. विपक्षी एकजुटता : चुनाव से महीने भर पहले तक ऐसा लग रहा था जैसे पूरी विपक्ष एकजूट हो कर मोदी और बीजेपी को पटखनी देने के लिए तैयार है लेकिन अखिलेश – मायावती के साथ कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन ना करके और अरविन्द केजरीवाल के साथ कांग्रेस ने दिल्ली में गठबंधन से मन करके एक बार फिर से वोटरों को विभाजित होने का मौका दे दिया। इसका परिणाम एग्जिट पोल्ल में भी दिखा है। ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू की भी जी तोड़ कोशिश की पूरी विपक्ष एक साथ आये, चुनाव से ठीक पहले हवा हो गयी।
६. सरकारी योजनाएं: सरकार की बहुत सी योजनाएं जैसे की उज्ज्वला योजना, जान धन, शौचालय , मुद्रा, स्वास्थ्य आदि ने जनता को विश्वाश दिलाया की मोदी सरकार आम जनता के विकाश के लिए कटिबद्ध है।

खैर अब सभी को इंतजार २३ मई का है। देखें इवीएम के पिटारे से किसकी किस्मत खुलती है।